सिया

सिया
म्हारे हिवड़े रो खुणु ...

Tuesday, March 17, 2015

हिवड़े रे हेत स्यूं !!

कद ताई ???

म्हारे हिवडे रा खूणा खूणा
बैठ्या हो थे बण देवातण
म्हारा प्रीत-धूप्या ने केवो
कद ताई नहीं निरखोला थे


आशा-मोती टूट बिख्ररीया
पडिया थारे पगथ्या माइ
इणा रि राखण लाज सारु
कद ताई नहीं पतिजोला थे


आन्धा रो गुड आ प्रीतडली
केवणू दोरो,रेवणू सांसो है
म्हारा अणकथ बखाणा ने
कद ताई नहीं समझोला थे


थारी मरवण घणी उडीके
कदे आव,बतलाव ही ल्यो
बणीया भाटो, म्हें भी देखूं
कद ताई नहीं सरकोला थे

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कांई नाम राखूं ?



थे जादूगर,सायब थे बाजीगर
थे म्हारा अनोखा सिरकार
थे हो रसिया नटखट मोहन
थे मिजाजी हठीला सिरदार


थाने पुकारूँ राम म्हें ...
के थांरो श्याम नाम राखूं ?

म्हारे काळजे रि कोर थे
थे हो म्हारे नैणा रि ज्योति
थे म्हारे चुङले रा सीणगार
हो थे म्हारी नथली रा मोती

थाने पुकारूँ रतन जङाव ...
के थांरो माणक नाम राखूं ?

थे हो म्हारा बादिला ढोला
हो थे ही म्हारे हिवडे रा हार
थे तो हो जुग-जुग री प्रीत
थे ही हो म्हारी साँस रा सार

थाने पुकारूँ जीवण-जेवङी ...
के थांरो प्राण नाम राखूं ?

थे बणीया मनडे रा मीत
थे ही म्हारा शुभ-सगुण हो
अब थे कह देवो भंवर जी
बताओ थे म्हारा कुण हो

थांरो कांई नाम पुकारूँ ...
म्हें थांरो कांई नाम राखूं ?


-सिया चौधरी

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