सिया

सिया
म्हारे हिवड़े रो खुणु ...

Tuesday, March 17, 2015

फागण आयो जी मेहमान ....!!!

हे रे सायबा , काती म काजळीयो काढूं, मिंगसर भरल्यूं मांग
फागण आयो जी भरतार ....

ऐ रे गोरिये , काती म करडावण करती, मिंगसर हटग्यो मान
फागण आयो जी मेहमान ....

हे रे सायबा , जेपरिये जाओ तो धण रे, चुनड़ लाज्यो च्यार
फागण आयो जी भरतार ....

हे रे सायबा , ओढ़ पे'र ने नाचूं में तो, देवर जी रे ब्याव
फागण आयो जी मेहमान ....

हे रे सायबा , बाटां जोऊं ऐकली में, ढळती मांझळ रात
फागण आयो जी भरतार ...

ऐ रे गोरिये , तूं मत बिलखे ऐकली, आऊँला ऐ में परभात
फागण आयो जी मेहमान ....

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