
थारै ई पाण...!
थारै ई पाण,
लगा लिया पांखड़ा
ऊभगी मेड़ी पर, पण
क्यूं डरपै है काळजो
उडण रै नांव सूं....!
थारै ई पाण,
कर लियो सिणगार
बैठगी डोली में, पण
क्यूं घबरावै है जीव
उण अणसैंधा गांव सूं....!
थारै ई पाण,
बांध लियो भरोसो
चाल पड़ी लारै, पण
क्यूं रुक-झुक खरूंचूं
आस री जमीं पांव सूं...!
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ओळूं आई...!
मां रै सागै थांरी
करती ही हथाई
ओळूं आई...!
मां रै सागै थांरी
करती ही हथाई
फेर आ जावती लाज
जद मां बतावती
सासरियै री कोई बात....।
म्हनैं पाछी
मधरै वायरै-सी
ओळूं आई...
बैनां चिड़ावती,
हंसती अर कैवती-
ओ लाडेसर जीजी!
थांरो ब्यांव करांला
कैर रै उपराळै बैठा....।
फेर कठै सूं
थाक्योड़ी-सी म्हनैं
ओळूं आई....
बिना खोट, क्यूं थे
भेज दियो संदेसो
कै नीं आवैली
म्हारै मांढै ऊपरां
थांरी बरात....।
-सिया चौधरी
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Note: कविता कोश का लिंक
http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE_%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80
जद मां बतावती
सासरियै री कोई बात....।
म्हनैं पाछी
मधरै वायरै-सी
ओळूं आई...
बैनां चिड़ावती,
हंसती अर कैवती-
ओ लाडेसर जीजी!
थांरो ब्यांव करांला
कैर रै उपराळै बैठा....।
फेर कठै सूं
थाक्योड़ी-सी म्हनैं
ओळूं आई....
बिना खोट, क्यूं थे
भेज दियो संदेसो
कै नीं आवैली
म्हारै मांढै ऊपरां
थांरी बरात....।
-सिया चौधरी
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Note: कविता कोश का लिंक
http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE_%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80
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